तालिबान को लेकर आखिरकार भारत के साथ खड़ी हुई दुनिया, संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी की बात पर मुहर


संयुक्त राष्ट्र महासभा (फाइल फोटो)- India TV Hindi News

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (फाइल फोटो)

UN General Assembly approves resolution against Taliban:अफगानिस्तान में जब तालिबानी तांडव कर रहे थे और पूरी दुनिया के सामने लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था तो सभी देश चुप थे। इसी का फायदा उठाकर तालीबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान में सरकार भी बना ली और चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। मगर इस पर पूरी दुनिया चुप्पी साधे रही। सिर्फ भारत ने तालिबान का खुलकर विरोध किया। पीएम मोदी ने अफगानिस्तान में तालीबानियों के शासन को पूरी दुनिया के लिए खतरा बताया था। देर से ही सही, लेकिन आखिरकार पूरी दुनिया को आज उस हकीकत का एहसास हो गया, जिसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों पहले ही बता दिया था। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में तालिबान के खिलाफ दुनिया के सभी देशों ने एक प्रस्ताव पारित कर दिया। इससे पीएम मोदी की कही गई पूर्व की बातों पर मुहर भी लग गई।  

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने तालिबान पर अफगान महिलाओं तथा लड़कियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को यह प्रस्ताव पारित किया है। उसने तालिबान पर एक प्रतिनिधि सरकार स्थापित करने में नाकाम रहने तथा देश को ‘‘गंभीर आर्थिक, मानवीय और सामाजिक स्थिति’’ में डालने का आरोप लगाया है। प्रस्ताव में 15 महीने पहले अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद से देश में निरंतर हिंसा और अल-कायदा तथा इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी समूहों के साथ ही ‘‘विदेशी आतंकवादी लड़ाकों’’ का भी जिक्र किया गया है।

193 सदस्यीय सभा में 116 मतों से पारित हुआ प्रस्ताव


संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी की राजदूत अंतजे लींदर्त्से ने उम्मीद जतायी थी कि 193 सदस्यीय महासभा आम सहमति से जर्मनी द्वारा प्रस्तावित इस प्रस्ताव को पारित कर देगी। आखिरकार वही हुआ और इस प्रस्ताव को 116 सदस्यों ने मंजूरी दी। रूस, चीन, बेलारूस, बुरुंडी, उत्तर कोरिया, इथियोपिया, गिनी, निकारागुआ, पाकिस्तान और जिम्बावे समेत 10 देश प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहे। इस प्रकार 67 देशों ने वोट नहीं दिया। सुरक्षा परिषद की तुलना में महासभा के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं, लेकिन वे दुनिया की राय को दर्शाते हैं। मतदान से पहले जर्मन राजदूत ने महासभा में कहा कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान ने ‘‘बड़े पैमाने पर आर्थिक तथा मानवीय संकट’’ देखा है, जिससे आधी आबादी ‘‘गंभीर खाद्य असुरक्षा’’ का सामना कर रही है। प्रस्ताव में महिलाओं तथा लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा समेत मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है।

तालिबानियों के साथ खड़े दिखे पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तरकोरिया

भारत ने तालिबान के खिलाफ और प्रस्ताव के पक्ष में खुलकर वोट किया, लेकिन पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तरकोरिया समेत दुनिया के 67 देश मतदान ने करके अफगानिस्तान के साथ खड़े दिखे। बावजूद भारी बहुमत से तालिबान के खिलाफ यह प्रस्ताव पारित हो गया। तालिबानियों का अफगानिस्तान में शासन आते ही भारत ने अलकायदा, इस्लामिक स्टेट, हक्कानी नेटवर्क जैसे खूंखार आतंकी समूहों से इनका गठजोड़ होने की आशंका जाहिर की थी। इससे पूरे विश्व में आतंकवाद बढ़ने को लेकर भी आशंका जताई थी। तालिबान के खिलाफ पारित हुए प्रस्ताव में कहीं न कहीं भारत द्वारा कही गई इन्हीं बातों को सच माना गया है। यह एक तरीके से भारत की बड़ी जीत है।

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