मंगोलिया तोहफे में क्यों देता है ‘घोड़े’? दौरे पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दिया गया, 7 साल पहले पीएम मोदी को भी मिला था


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Highlights

  • मंगोलिया तोहफे में देता है घोड़े
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दिया गया
  • उन्होंने घोड़े का नाम तेजस रखा है

Mongolia Horse Gifts: मंगोलिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को देश के राष्ट्रपति ने बुधवार को एक घोड़ा उपहार स्वरूप दिया है। सात वर्ष पूर्व मंगोलिया की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ऐसा ही तोहफा मिला था। सिंह ने सफेद घोड़े की तस्वीर के साथ बुधवार को ट्वीट किया, “मंगोलिया में मेरे खास दोस्तों की ओर से दिया गया विशेष उपहार। मैंने इस सुंदर घोड़े का नाम ‘तेजस’ रखा है। राष्ट्रपति खुरेलसुख को धन्यवाद। मंगोलिया को धन्यवाद।” सिंह ने मंगलवार को मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। 

उन्होंने ट्वीट किया, “उलानबटोर में मंगोलिया के राष्ट्रपति यू. खुरेलसुख से अच्छी मुलाकात हुई। मैं उनसे पिछली बार 2018 में मिला था जब वह देश के प्रधानमंत्री थे। हम मंगोलिया के साथ बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में मंगोलिया की यात्रा पर गए थे तब उनके समकक्ष सी. साईखानबिलेग ने उन्हें एक भूरा घोड़ा भेंट किया था। सिंह ने मंगलवार को मंगोलिया के राष्ट्रपति यू. खुरेलसुख, स्टेट ग्रेट खुराल (संसद) के अध्यक्ष जी. जानदनशतार और रक्षा मंत्री जनरल सैखानबयार से मुलाकात की थी।

मंगोलिया से रक्षामंत्री दो दिवसीय यात्रा पर जापान जाएंगे। वह आठ और नौ सितंबर को जापान में होंगे। वह जापान के साथ ‘टू प्लस टू’ प्रारूप में आठ सितंबर को होने वाली वार्ता में शामिल होंगे। जापान के प्रधानमंत्री फुमिओ किशिदा के वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत की यात्रा करने के करीब पांच महीने बाद यह वार्ता हो रही है।

 
तोहफे में घोड़े ही क्यों दिए जाते हैं?

घोड़े मंगोलिया की संस्कृति में अहम स्थान रखते हैं। साथ ही इन्हें यहां के दैनिक जीवन में जरूरी और सम्मान के एक स्त्रोत के तौर पर देखा जाता है। पारंपरिक रूप से कहा जाता है कि “घोड़े के बिना मंगोल बिना पंखों के पक्षी की तरह हैं।” यात्रा, पशुपालन, शिकार और खेलकूद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ये घोड़े सबसे बेशकीमती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगोलिया की राजधानी उलानबटार के बाहर रहने वाले एक चरवाहे का कहना है, “हम मंगोल रात और दिन के साथी के रूप में घोड़े का सम्मान करते हैं। घोड़ा एक मंगोलियाई चरवाहे के आनंद और गौरव का स्रोत है।”

हाल के वर्षों में, राजनेताओं ने कूटनीति के लिए घोड़ों को उपहार के तौर पर देना शुरू किया है। परंपरागत रूप से महान सम्मान का प्रतीक घोड़े का उपहार मंगोलिया में किसी अन्य व्यक्ति को सम्मानित करने के सबसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। इससे पहले 2019 में ऐसा दो बार हुआ। तब डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर को घोड़े उपहार में दिए गए थे। मंगोलिया में, अधिकांश लोग आज भी घोड़ों की सवारी करते हैं। शहर में पैदा हुए कई बच्चे अपने माता-पिता के साथ छुट्टियों के लिए ग्रामीण इलाकों में जाते हैं और घोड़ों की सवारी करना सीखते हैं। 

कार और मोटरसाइकिल के आने के बाद से 2000 के दशक से ही मंगोलिया में घोड़ों का इस्तेमाल कम होने लगा। लेकिन मंगोलिया में घोड़े से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा खत्म नहीं हुई। यहां संस्कृति के तौर पर इसका इस्तेमाल होता है। मंगोलिया में जिसके पास जितने घोड़े होते हैं, उसे उतना ही अमीर माना जाता है। यहां शहरों में अपने पास घोड़े रखना खुद को अमीर दिखाने का तरीका भी बन गया है। अमीरों के लिए एक घोड़े को खरीदते वक्त 10000 डॉलर देना भी कोई ज्यादा रकम नहीं है। हाल के वर्षों में कूटनीति के तहत राजनेताओं को घोड़े तोहफे में दिए जा रहे हैं। जैसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए।

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