यूक्रेन के एयर स्ट्राइक में रूस के ऑयल डिपो में लगी आग, इन देशों को हो सकती है तेल की किल्लत


मॉस्को. रूस-यूक्रेन जंग को 2 महीने से ज्यादा वक्त हो रहा है, लेकिन जंग खत्म होने की जगह बढ़ती जा रही है. इसी बीच यूक्रेन ने सोमवार को रूस के ब्रियांस्क शहर में हमला किया. यूक्रेनी सैनिकों ने मिसाइलें दागी हैं, जिसमें एक ऑयल डिपो तबाह हो गया. लपटों और धुएं के गुबार को देखकर आग की भीषणता का अंदाजा लगाया जा सकता है. धमाके के बाद उठी आग की लपटें किसी ज्वालामुखी से कम नहीं लग रहीं.

रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सोमवार को लगी आग से ब्रियांस्क में डीजल ईंधन वाले एक डिपो को नुकसान पहुंचा है.अधिकारी इस घटना से उत्पन्न चीजों को देख रहे हैं. ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि देश के पश्चिमी हिस्से में एक तेल डिपो में भीषण आग लगने की घटना के कारण ईंधन की कोई कमी नहीं होगी.

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मंत्रालय के मुताबिक, उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति बाधित नहीं हुई है और इस क्षेत्र में 15 दिन के लिए पर्याप्त डीजल ईंधन है. इस तेल डिपो का स्वामित्व सरकारी कंपनी ट्रांसनेफ्ट की सहायक कंपनी ट्रांसनेफ्ट-ड्रूज़बा के पास है, जो यूरोप में कच्चा तेल ले जाने वाली ड्रूज़बा (मैत्री) पाइपलाइन का संचालन करती है.

भले ही रूस तेल डिपो में लगी आग से हुए नुकसान को कम आंककर देख रहा है, लेकिन अमेरिका के सहयोगी देश NATO इससे इत्तेफाक नहीं रखते. नाटो विशेषज्ञ थॉमस सी थेनर ने ट्वीट किया- “अगर आग ड्रूज़बा तेल पाइपलाइन पंप में लगी है तो रूस की यूरोप की एकमात्र तेल पाइपलाइन नष्ट हो गई है. मतलब जर्मनी, ऑस्ट्रिया और हंगरी को अब रूसी तेल नहीं मिलेगा.”

बता दें कि ड्रूज़बा पाइपलाइन 5500 किलोमीटर तक फैली हुई है. ये साइबेरिया, उरल्स और कैस्पियन सागर में कई यूरोपीय संघ के देशों के माध्यम से कच्चा तेल भेजती है. इस पाइपलाइन को बेलारूस में मोजियर के माध्यम से चलाया जा रहा है, जहां यह उत्तरी और दक्षिणी शाखा में विभाजित होती है.

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उत्तरी शाखा बेलारूस और पोलैंड से होते हुए जर्मनी तक जाती है. जबकि दक्षिणी शाखा यूक्रेन से गुजरती है. बाद में स्लोवाकिया, चेक गणराज्य और हंगरी को विभिन्न मार्गों के माध्यम से तेल की सप्लाई की जाती है. इस पाइपलाइन से एक दिन में 1.2-1.4 मिलियन बैरल तेल भेजा जाता है.

रूस के कच्चे तेल का लगभग 70 प्रतिशत से 85 प्रतिशत आयात बाल्टिक सागर और काला सागर पर पश्चिमी बंदरगाहों के माध्यम से होता है. यूरोप में अधिकांश आयात तेल टैंकरों और बंदरगाहों के माध्यम से किया जाता है.

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