यूक्रेन के डोनबास-ल्वीव शहरों में तबाही, कीव पहुंचे मैक्रों और जर्मन चांसलर


Russia-Ukraine War News Update: रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी से जंग जारी है. रूसी सैनिक (Russian Military) लगातार आधुनिक हथियारों से यूक्रेन के शहरों पर हमले कर रहे हैं. इस बीच रूसी सेना ने यूक्रेन के पश्चिमी ल्वीव क्षेत्र (Lviv Region) में एक डिपो को नष्ट करने के लिए बुधवार को लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया. यहां नाटो द्वारा आपूर्ति किए गए हथियारों के लिए गोला-बारूद संग्रहीत किया गया था. पूर्वी शहर के गवर्नर ने स्वीकार किया है कि रूसी सेना भीषण लड़ाई में आगे बढ़ रही है. वही, रूसी सैनिकों से सामना के लिए अमेरिका (America) और जर्मनी (Germany) यूक्रेन को हथियार मुहैया करा रहे हैं.

इसके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज और इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. इन सभी नेताओं ने पहले कीव के उन हिस्सों का दौरा किया, जहां रूस ने जबरदस्त हमले किए हैं. इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की के साथ लंबी मीटिंग की. इसके बाद यह तय हुआ कि नाटो यूक्रेन को बहुत जल्द बड़ी मदद देगा. हालांकि, मदद के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई.

इसके साथ ही आइए जानते हैं रूस और यूक्रेन जंग के बड़े अपडेट्स…

यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र हाल के हफ्तों में रूस के आक्रमण का केंद्र बन गई है. रूस समर्थित अलगाववादियों ने यूक्रेनी बलों पर शहर के अज़ोट केमिकल प्लांट से नागरिकों की निकासी में बाधा का आरोप लगाया. बताया जाता है कि यहां लगभग 500 नागरिक और अज्ञात संख्या में यूक्रेनी लड़ाके मिसाइल हमलों से सुरक्षा के लिए आश्रय लिए हुए हैं.

रूसी अधिकारियों ने एक दिन पहले एज़ोट संयंत्र से मानवीय गलियारे की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने कहा कि वे नागरिकों को रूसी द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में ले जाएंगे, न कि यूक्रेनी बलों द्वारा नियंत्रित इलाके में. लुहांस्क के यूक्रेनी गवर्नर सेरही हैडाई ने कहा कि शहर में स्थिति बदतर होती जा रही है, क्योंकि रूसी सेना के पास अधिक जनशक्ति और हथियार हैं.

रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने कहा कि नाटो सदस्य पोलैंड के साथ सीमा के पास ल्वीव क्षेत्र में रूसी सेना ने ज़ोलोचिव शहर के पास डिपो को नष्ट करने के लिए कलिब्र मिसाइलों (Kalibr Missiles) का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि चार हॉवित्जर कहीं और नष्ट कर दिए गए.

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो देश बहुत जल्द यूक्रेन की उस मांग को पूरा कर सकते हैं, जिसमें उसने रूस से मुकाबले के लिए भारी हथियारों की मांग की थी. अप्रैल में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन भी कीव गए थे.

माना जा रहा है कि नाटो देश सबसे पहले यूक्रेन को 6 ट्रक से दागे जाने वाली स्पेशल हॉवित्जर यूनिट दे सकते हैं. फ्रांस इसकी 12 यूनिट पहले ही यूक्रेन को दे चुका है. रूस इन मिसाइलों के हमले से परेशान है और इसकी वजह से उसे दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन पर कब्जा छोड़ना पड़ा.

कीव में मीडिया से बातचीत के दौरान मैक्रों ने कहा- ‘हमने यहां आकर जमीनी हालात का जायजा लिया है. यूक्रेन अपने वजूद की जंग लड़ रहा है। उसकी आजादी और वजूद को बचाने की जिम्मेदारी हमारी भी है. यही हमारा टारगेट है और इसे हासिल करने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है.’

एक सवाल के जवाब में मैक्रों ने कहा- ‘यूक्रेन को यूरोपीय यूनियन की मेंबरशिप दिलाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए नियम हैं और हम कोशिश कर रहे हैं कि जितनी जल्दी हो सके, यूक्रेन को पहले यूरोपीय यूनियन की मेंबरशिप दिलाई जाए.’

रूस ने यूक्रेन के पूर्वी राज्य लिसिचांस्क पर जबरदस्त हमले जारी रखे हैं. सेवेरोडोनेट्स्क यहां का अहम शहर है. रूसी फौज ने इस शहर तक जाने वाले तमाम ब्रिज उड़ा दिए हैं. अब यहां के लोग खेतों और नहरों के जरिए यहां से भागने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, कुछ ट्रेन रूट्स भी खुले हैं.

खास बात यह है कि रूसी फौज तीन दिन से 18 किलोमीटर दूर अटकी हुई है. यूक्रेन की फौज उसका पूरी ताकत से मुकाबला कर रही है.

रूस की पूरी कोशिश यह है कि किसी तरह इस शहर को कब्जे में लिया जाए, ताकि पूर्वी हिस्से की सप्लाई चेन तोड़ी जा सके. पहले उसे यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं लग रहा था, लेकिन अब यह टारगेट काफी मुश्किल नजर आ रहा है. यूक्रेन ने यहां भारी हथियार तैनात किए हैं. अब तक 10 हजार लोग इस शहर को छोड़कर जा चुके हैं.

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FIRST PUBLISHED : June 17, 2022, 07:52 IST



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