यूक्रेन के मारियूपोल में होगी रूस की विक्ट्री परेड? क्या है पुतिन का इरादा और नाजियों से इसका रिश्ता?


रूस-यूक्रेन युद्ध को करीब ढाई महीने हो चुके हैं. यूक्रेन का एक बड़ा इलाका तबाह हो चुका है. हर तरफ बर्बादी के निशान साफ हैं. लेकिन जंग थमने के कोई आसार नहीं दिख रहे. इस बीच रूस 9 मई को अपना विक्ट्री डे मनाने जा रहा है. 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में इसे मनाया जाता है. माना जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस दिन का इस्तेमाल सैन्य ताकत का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हुए बड़ा संदेश देने के लिए करेंगे. ऐसी भी अटकलें हैं कि रूस ही नहीं, यूक्रेन के मारियूपोल में भी विक्ट्री परेड हो सकती है. पूरी दुनिया की नजर इस पर हैं. यूक्रेन पर हमले को रूस नाजियों के खिलाफ जंग बताकर जायज ठहराता रहा है. द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन इस बार विक्ट्री डे को एक तरह से रूस की नई पहचान के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं.

विक्ट्री डेः कुर्बानी को याद करने का दिन
विक्ट्री डे पर रूस में उसी तरह की परेड और सैन्य प्रदर्शन होता है, जैसा भारत में 26 जनवरी को दिखाई देता है. लेकिन कई मायनों में ये बिल्कुल अलग है. रूस में इस दिन लोग अपने उन करीबियों को याद करते हैं, जिन्होंने जर्मन नाजियों के खिलाफ लड़ते हुए जान कुर्बान कर दी थी. रूस में शायद ही कोई परिवार होगा, जिसने जंग में अपना कोई करीबी न खोया हो. पिछले कुछ वर्षों में विक्ट्री डे का एक स्लोगन खूब परवान चढ़ा है – we can do it again. यूक्रेन पर 24 फरवरी को रूसी चढ़ाई को जायज ठहराने के लिए वह दूसरे विश्व युद्ध से जोड़कर इसी नजरिए का इस्तेमाल करता रहा है. युद्ध शुरू करते हुए पुतिन ने साफ कहा था कि उनका मकसद देश (यूक्रेन) को नाजियों से आजादी दिलाना है. मार्च के मध्य में मॉस्को के स्टेडियम में पुतिन के भाषण के दौरान झंडे लहराती भीड़ के बीच बैनर लगे थे- फासीवाद से आजाद दुनिया. पुतिन के सैनिक अब नारंगी-काले रंग का सेंट जॉर्ज रिबन पहनते हैं, जो कभी दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत का सिंबल था और अब यूक्रेन युद्ध में रूसी सैनिकों की पहचान बन चुका है.

यूक्रेन को नाजी की तरह देखता है रूस
द गार्डियन के मुताबिक, यूक्रेन पर हमले को जायज ठहराने के लिए कई तर्क दिए जाते हैं, जैसे नाटो के विस्तार का खतरा, यूक्रेनी भाषा व संस्कृति पर साम्राज्यवाद के बाद वाली तिरस्कार की छाया, एक नेता जिसे अलग-थलग पड़ने का डर है. इसके अलावा पुतिन के दो दशक के कार्यकाल में नया रूप ले चुकी नाजियों से जंग लड़ने और जीतने की सनक तो है ही. पुतिन के सैनिक यूक्रेन के लोगों को भी नाजियों की तरह देख रहे हैं. यही वजह है कि दूसरे विश्व युद्ध के जैसे ही खून-खराबा, आम नागरिकों को निशाना बनाना, विरोधियों को जेलखानों में डालकर अत्याचार जैसे कदमों से भी पीछे नहीं हट रहे. ब्रिटिश अखबार का कहना है कि रूस के लोगों में हर हाल में जीतने की सनक ने पिछले कुछ बरसों में भद्दा रूप ले लिया है. स्कूलों में बच्चों को सोवियत संघ की ड्रेस पहनाकर परफॉर्म कराया जाता है. नाजी कैदियों के रूप में सड़कों पर लोगों की परेड होती है. यहां तक कि रूस के इस बदले रूप का विरोध करने वालों को नाजी, नियो नाजी या उनके सहयोगी करार दे दिया जाता है.

रूस की ताकत के प्रदर्शन का मौका
रूस के नेता और अधिकारी आजकल हर समय दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र करते नजर आते हैं. विदेश मंत्रालय लगभग रोज ऐसे ट्वीट करता है. पुतिन के करीबी और रूस के प्रभावशाली नेता निकोलाई पेत्रुशेव पश्चिमी देशों और उसकी कठपुतली (यू्क्रेन) को नाजियों का असली वंशज बता चुके हैं. रूसी नागरिकों के सामने नाजियों का ये रूप पेश करते हुए वो नाजियों के नरम चेहरे को अनदेखा कर देते हैं. नाजियों के प्रति सनक की हद तक इसी बेरुखी के बीच विक्ट्री डे पिछले कुछ सालों में इतिहास को याद करने के बजाय नए रूस की ताकत के प्रदर्शन का हथियार ज्यादा बन गया है.

रूसी सैनिकों पर दूसरे विश्वयुद्ध की छाया
2008 में पहली बार रूस ने विक्ट्री डे में भारी हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया, और उसके तीन महीने बाद ही रूस ने जॉर्जिया पर आक्रमण कर दिया था. 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के पीछे भी नाजीवादी मानसिकता का उदाहरण दिया गया था. अब यूक्रेन के मारियूपोल पर कब्जे के समय भी रूसी सैनिक दूसरे विश्व युद्ध की छाया दिमाग में लेकर काम कर रहे थे. गार्डियन के मुताबिक, मारियूपोल के मेयर इवान फ्योदोरोव बताते हैं कि जब मार्च में रूसी सैनिकों ने उन्हें अगवा किया था, तब वे लोग यही बात दोहरा रहे थे कि इस शहर ने दूसरे विश्व युद्ध के सेनानियों का अपमान हुआ था, उन्हें पीटा गया था.

रूस के हथियार से उसी पर वार कर रहे जेलेंस्की
अखबार लिखता है कि अब अगर पुतिन 9 मई को यूक्रेन के मारियूपोल में विक्ट्री परेड करते हैं तो रूस में लोगों को यह मैसेज जाएगा कि शहर को यूक्रेनी नाजियों और उनके अमेरिकी हमदर्दों के कब्जे से आजाद करा लिया गया है. दूसरी तरफ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की भी पुतिन की इसी सोच का इस्तेमाल अपने नागरिकों को रूस के खिलाफ एकजुट करने में कर रहे हैं. वह मौजूदा रूस को नाजियों का असली वारिस करार दे रहे हैं. रूसी सैनिकों को आजकल यूक्रेन में रासिस्ट कहकर बुलाया जा रहा है, ये शब्द रशिया और फासिस्ट को जोड़कर बनाया गया है. कीव में ऐसे पोस्टरों की भरमार है, जिनमें 1941 और 2022 की तुलना की गई है. इन दोनों ही बरसों में कीव पर दुश्मन का हमला हुआ. जेलेंस्की इन शहरों को हीरो सिटी का दर्जा दे रहे हैं, जहां रूसी सैनिकों की कड़ी टक्कर मिल रही है. हीरो सिटी मूल रूप से सोवियत संघ की ही परंपरा रही है.

Tags: Russia ukraine war, Ukraine, Vladimir Putin



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