यूरोप का नया कानून ‘DSA’ कैसे ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल कसेगा? जानिए 4-पहलू में


नई दिल्ली. ऑनलाइन कंपनियों के मनमाने रवैये पर दुनियाभर में बहस जारी है. इसी बीच, यूरोपीय देशों के संघ (EU) ने एक कानून को मंजूरी दी है. इसे डिजिटल सेवा अधिनियम (Digital Service Act- DSA) नाम दिया गया है. इसे संघ के सभी सदस्य देश अपने यहां समान रूप से लागू करेंगे. इसके प्रावधान तमाम बड़ी-छोटी ऑनलाइन कंपनियों पर न सिर्फ नकेल कसने वाले हैं, बल्कि भविष्य में उनकी दशा-दिशा बदलने वाले भी साबित हो सकते हैं. क्योंकि अगर वे कानून का उल्लंघन करते हैं, तो उनकी दशा यानी हालत खराब हो जाएगी. कानून के मुताबिक चलते हैं या उसका कोई तोड़ भी निकालते हैं, तो दोनों ही स्थितियों में उन्हें अपनी दिशा बदलनी पड़ेगी. कैसे? इसे 4-पहलू (The 4-Aspects) में जानने और समझने की कोशिश करते हैं.

यूरोपीय संघ की संसद से पारित होने के बाद 2024 से लागू होगा
यूरोपीय संघ (EU) के 27 सदस्यों के बीच इसी शनिवार, 23 अप्रैल को डीएसए (DSA) पर सहमति बनी है. इससे पहले ईयू के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, उसकी कार्यपालिका और संघ की संसद (EU Parliament) के सदस्यों के बीच इस करीब 16 घंटे की लंबी बहस हुई. इसके बाद डीएसए से जुड़े सहमति-पत्र (Agreement) को मंजूरी दी गई. यह कानून ईयू की संसद से पारित होने और सदस्यों देशों की सरकारों, विधायिकाओं द्वारा मंजूर किए जाने की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 2024 से यूरोपीय संघ में लागू हो जाएगा. ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल कसने के मामले में ईयू की यह दूसरी बड़ी सफलता है. इससे पहले बीते महीने ईयू के सदस्य देशों ने डीएसए से ही मिलते-जुलते डीएमए (Digital Market Act) को भी मंजूरी दी थी.

जो ऑफलाइन में आपराधिक वह अब ऑनलाइन में भी, नहीं तो…
यूरोप में ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल कसने के लिए की जा रही कार्रवाईयों की अगुवाई मार्गरेट वेस्टेजर कर रही हैं. वे यूरोपीय संघ में उस इकाई की प्रमुख हैं, जो आम लोगों के भरोसे पर लगने वाले आघात (Antitrust) से जुड़े मसलों को काम देखती है. मार्गरेट कहती है, ‘डीएसए यह सुनिश्चित करेगा कि जो बात, व्यवहार ऑफलाइन में अपराध है, वह ऑनलाइन में भी वैसी ही समझी जाए. यह अब सिर्फ नारा नहीं रहेगा. बल्कि सच्चाई के धरातल पर उतरने वाला है.’ इसी तरह ईयू के आंतरिक बाजार आयुक्त (Internal Market Commissioner) थियरी ब्रेटन कहते हैं, ‘अब तक अधिकांश बड़ी ऑनलाइन कंपनियां इस तरह व्यवहार करती रही हैं, जैसे वे कानून से ऊपर हैं. उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. लेकिन अब यह सब खत्म होगा. कार्रवाई होगी.’  

ईयू के इस कानून से दुनिया में भारत का पक्ष मजबूत हुआ

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