Indo-Australia Relationship:भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल का ऑस्ट्रेलिया ने किया जोरदार समर्थन, जानें क्या है पूरी योजना


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Highlights

  • भारत के हिंद-प्रशांत प्रसार योजना से आस्ट्रेलिया सहमत
  • भारत अपनी समुद्री सीमा को देना चाहता है विस्तार
  • आस्ट्रेलिया करेगा भारत का सहयोग

Indo-Australia Relationship: पिछले आठ वर्षों में भारत की धाक पूरी दुनिया में बढ़ी है। इसकी वजह देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में होने के साथ ही साथ आर्थिक, सामरिक और व्यापार के क्षेत्र में भारत का लगातार बढ़ता हुआ प्रभुत्व है। इसी के मद्देनजर भारत ने अब अपनी समुद्री सीमा क्षेत्र को विस्तार देना चाहता है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने पिछले दिनों कहा था कि जब हम समुद्री सीमा की बात करते हैं तो हमारा मतलब सिर्फ हिंद महासागर तक ही नहीं होता, बल्कि यह प्रशांत महासागर समेत अन्य महासागरों तक होता है। 

विदेश मंत्री के अनुसार भारत अब दुनिया के शक्तिशाली देशों की पंक्ति में खड़ा है। ऐसे में वह अपनी आर्थिक और सामरिक ताकत को और बढ़ाना चाहता है। इसके लिए समुद्री सीमा का विस्तार सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से अहम हो जाता है। इसलिए भारत को अपने हितों की पूर्ति के लिए अब हिंद तक सीमित नहीं रहकर प्रशांत महासागर तक विस्तार करना होगा। देश इस दिशा में काम कर रहा है। अब आस्ट्रेलिया ने भारत की इस पहल का समर्थन किया है। 

आस्ट्रेलिया के साथ भारत बढ़ाएगा सहयोग


मंगलवार को भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आइपीओआइ) का ‘‘त्वरित और मजबूती से समर्थन’’ करने के लिए ऑस्ट्रेलिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों के प्रारूप में बदलाव आया है और यह रिश्ते उच्च स्तर पर पहुंच गये हैं। ‘ऑस्ट्रेलिया-इंडिया लीडरशिप डायलॉग-2020’ को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल-2022 में हुए आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते से 20 अरब डॉलर के कारोबार और 25 अरब डॉलर के निवेश के स्तर में तेजी से विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारतीय विद्यार्थियों, जिनकी संख्या एक लाख से अधिक है, के लिए शिक्षा का अहम केंद्र है जबकि वहां भारतीय समुदाय की अनुमानित संख्या 7.2 लाख है जो दोनों समाजों की मजबूती का स्रोत है।

मजबूत नेतृत्व और खुले आदान-प्रदान से दोनों देशों में बढ़ी नजदीकी

 जयशंकर ने कहा, ‘‘ लेकिन वास्तव में राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर परिवर्तन सबसे तेज रहा है। अधिकतर झुकाव की वजह क्षेत्रीय स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा की चिंता रही।’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक सामान की कमी की समस्या का समाधान भी, भारत और ऑस्ट्रेलिया को द्विपक्षीय स्तर पर और बड़े पैमाने पर मिलकर काम करने की मांग करता है। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ यह अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम आधारित व्यवस्था के प्रति साझा चिंता से प्रतिबिंबित होता है। दोनों देश के आसियान नीत मंच, राष्ट्रमंडल, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन आदि में लंबे संवाद हुए होंगे, लेकिन मजबूत नेतृत्व और अधिक खुले आदान-प्रदान दोनों देशों को आपसी हित के लिए सहयोग और समन्वय के वास्ते करीब ले आए।

आस्ट्रेलिया भारत को कर रहा समुद्री सहयोग

भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) का ऑस्ट्रेलिया शुरुआती और मजबूत समर्थक रहा है। बड़ा बदलाव यह अहसास है कि आज मजबूत द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों को अधिक प्रभावी तरीके से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर योगदान देने में सक्षम बनाते हैं।’’ गौरतलब है कि आईपीओआई को वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’’ (एसएजीएआर) पहल के आधार पर तैयार किया गया है। ऑस्ट्रेलिया-भारत हिंद-प्रशांत महासागर पहल साझेदारी (एआईआईपीओआईपी) विशेष तौर पर हिंद-प्रशांत महासागर में मुक्त, समावेशी,लचीली और नियम आधारित व्यवस्था का समर्थन करने के लिए समुद्री सहयोग पर केंद्रित है। जयशंकर ने इस दौरान नए जोश से दोनों देशों के बीच चल रहे संवाद पर भी बात की फिर चाहे वह नेतृत्व के स्तर पर हो या निचले स्तर पर। उन्होंने हाल के महीनों में हुए समझौतों का भी उल्लेख किया। 

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