Mini Moon: वैज्ञानिकों ने खोज निकाला ‘मिनी मून’, अबतक अब सौर मंडल में कितने मिले चांद


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Mini Moon

Highlights

  • सौरमंडल में अब तक 200 से ज्यादा ऐसे चंद्रमा खोजे जा चुके हैं,
  • यह खगोलीय पिंड अमेरिका के मैनहट्टन से थोड़ा चौड़ा है
  • 2027 के अंत तक ट्रोजन क्षुद्रग्रहों तक पहुंच जाएगा

Mini Moon: हमारे सौर मंडल में कई चंद्रमा हैं, शायद इसके बार में आपको जानकारी नहीं होगी। हालांकि हम पृथ्वी से सिर्फ एक ही दिखाई देती है क्योंकि केवल एक प्राकृतिक उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसी तरह खगोलविदों ने अब सौर मंडल में एक ‘मिनी-मून’ की खोज की है। यह एक चट्टानी पिंड है जो बृहस्पति ग्रह के पास एक छोटे क्षुद्रग्रह की परिक्रमा करता है। यह खगोलीय पिंड अमेरिका के मैनहट्टन से थोड़ा चौड़ा है। यदि इस चट्टानी उपग्रह को चंद्रमा के रूप में पुष्टि की जाती है, तो यह अब तक का सबसे छोटा चंद्रमा होगा। नासा के लूसी मिशन पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने इस ‘मिनी मून’ की खोज की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कुछ ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का अध्ययन करने के लिए लुसी मिशन के तहत अंतरिक्ष जांच भेजी है, जो बृहस्पति के चारों ओर आकाशीय चट्टानों के दो विशाल समूह हैं। लुसी प्रोब 16 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था और 2027 के अंत तक ट्रोजन क्षुद्रग्रहों तक पहुंच जाएगा। इसी बीच में यह मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित क्षुद्रग्रह बेल्ट में कुछ समय के लिए रहेगा।

मिनी मून सिर्फ 5 किमी चौड़ा

 वैज्ञानिक इन रहस्यमय क्षुद्रग्रहों के बारे में अधिक अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि जांच सबसे उपयोगी कहां होगी। नए खोजे गए उपग्रह का व्यास लगभग 5 किमी है। यह 27 किमी चौड़े क्षुद्रग्रह से 201 किमी की दूरी पर स्थित है। खोज के समय, क्षुद्रग्रह पृथ्वी से 772 मिलियन किमी दूर स्थित था। ‘चंद्रमा’ शब्द का उपयोग किसी भी ठोस प्राकृतिक वस्तु के लिए किया जा सकता है जो किसी ग्रह, क्षुद्रग्रह या क्षुद्रग्रह की परिक्रमा करता है, इसलिए इसे ‘मिनी-मून’ कहा जा रहा है।

अब तक मिले 200 से ज्यादा चांद
नासा के मुताबिक, सौरमंडल में अब तक 200 से ज्यादा ऐसे चंद्रमा खोजे जा चुके हैं, जिनमें क्षुद्रग्रहों के चंद्रमा शामिल नहीं हैं। लेकिन इनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। शोधकर्ता इस वस्तु को केवल एक क्षण के लिए ही देख पाए थे इसलिए इसका कक्षीय पथ अत्यधिक अनिश्चित है। इसलिए, वैज्ञानिकों ने अभी तक आकाशीय पिंड को ‘चंद्रमा’ के रूप में पुष्टि नहीं की है और न ही इसे कोई अन्य नाम दिया है।

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