QUAD कब, कैसे और किसलिए बना? जानें इसका A to Z


टोक्यो. जापान के टोक्यो में QUAD समिट का आयोजन हुई. QUAD चीनी दबदबे पर रोक लगाने के लिए बना भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का गठबंधन है. आज की समिट में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी, जापान के पीएम फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज शामिल हुए. चीन QUAD को लेकर हमेशा से ही आपत्ति जताता रहा है और इससे उसे घेरने की अमेरिकी चाल बताता रहा है.

जानते हैं कि आखिर क्या है QUAD? क्यों QUAD से चिढ़ा रहता है चीन? कैसे भारत बन सकता है इस संगठन का गेमचेंजर? चीन को रोकने के लिए क्या है QUAD का प्लान?

  • आखिर क्वॉड क्या है? कैसे बना?

    क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग यानी QUAD चार देशों- अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक रणनीतिक गठबंधन है. इसका गठन 2007 में हुआ था. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, QUAD के गठन का प्रमुख अघोषित उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र यानी हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर के बीच पड़ने वाले इलाके में चीन के बढ़ते दबदबे पर लगाम लगाना है. साथ ही इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों को चीनी प्रभुत्व से बचाना भी है.

  • क्वाड की स्थापना कैसे हुई?

    2007 में पहली बार इसका विचार आया था. जापान ने QUAD बनाने की पहल की थी. चीन और रूस ने इसका विरोध किया था. 2008 में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप से बाहर रहा. 10 साल तक यह आइडिया रुका रहा. फिर 2017 में इस पर सक्रिय तरीके से काम शुरू हुआ. नवंबर 2017 में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान ने क्वाड की स्थापना के लंबित प्रस्ताव को आकार दे दिया. इसका मकसद सामरिक रूप से अहम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच प्रमुख समुद्री मार्गों को किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक नई रणनीति विकसित करना था.

  • क्वॉड का मकसद क्या है?

    QUAD का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को किसी भी सैन्य या राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना है. इसे मुख्यतया चीनी दबदबे को कम करने के लिए बनाए गए एक रणनीतिक समूह के रूप में देखा जाता है. QUAD का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और समृद्ध बनाने की दिशा में काम करना है। QUAD न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक से लेकर साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन, महामारी और शिक्षा जैसे अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करता है.

  • चीन क्यों करता है क्वॉड का विरोध?

    चीन शुरू से ही QUAD का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसे वह अपने वैश्विक उभार को रोकने वाली रणनीति के रूप में देखता है. चीनी विदेश मंत्रालय का आरोप है कि QUAD उसके हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहा है. कई मौकों पर चीन QUAD को एशियाई NATO तक कह चुका है. हाल ही में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा था कि QUAD अप्रचलित हो चुके शीत युद्ध और सैन्य टकराव की आशंकाओं में डूबा हुआ है. इसलिए इसका खारिज होना तय है.

  • भारत के लिए क्यों जरूरी है QUAD?

    माना जाता है कि QUAD रणनीतिक तौर पर चीन के आर्थिक और सैन्य उभार को काउंटर करता है. इसलिए ये गठबंधन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन का भारत के साथ लंबे समय से सीमा विवाद रहा है, ऐसे में अगर सीमा पर उसकी आक्रामकता ज्यादा बढ़ती है, तो इस कम्युनिस्ट देश को रोकने के लिए भारत QUAD के अन्य देशों की मदद ले सकता है. साथ ही QUAD में अपना कद बढ़ाकर भारत चीनी मनमानियों पर अंकुश लगाते हुए एशिया में शक्ति संतुलन भी कायम कर सकता है.

  • इंडो-पैसिफिक रीजन क्या है?

    यह क्षेत्र 14 देशों से बना है: ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बर्मा, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे महान वर्तमान और भविष्य के इंजनों में से एक है.

  • इंडो-पैसिफिक इकनॉमिक फ्रेमवर्क क्या है?

    इंडो-पैसिफिक इकनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) की पहली झलक पिछले साल अक्टूबर में ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा कही गयी बातों में दिखी थी. बाइडन ने कहा, “अमेरिका भारत-प्रशांत आर्थिक ढांचे के डेवलपमेन्ट के लिए भागीदार देशों के साथ मिलकर काम करेगा. यह हमारी ट्रेड फैसिलिटी (व्यापर सुविधा), डिजिटल इकनॉमिक्स और टेक्नोलॉजी के स्टैंडर्ड, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन, डीकार्बोनाइजेशन और स्वच्छ ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्कर स्टैंडर्ड और साझा हितों के अन्य क्षेत्रों के आसपास हमारे साझा उद्देश्यों को परिभाषित करेगा”

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    FIRST PUBLISHED : May 24, 2022, 12:41 IST



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