Russian Submarine: यूक्रेन युद्ध छोड़ भूमध्य सागर पहुंची क्रूज मिसाइल से भरी रूस की सबसे ताकतवर पनडुब्बी, आखिर किस मकसद को करेगी पूरा?


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Highlights

  • भूमध्य सागर पहुंची है रूस की पनडुब्बी
  • मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर है
  • 40 कैलिबर मिसाइल ढो सकती है

Russian Submarine: यूक्रेन के साथ जारी जंग के बीच रूस ने अपनी ताकतवर पनडुब्बी सेवेरॉद्वीन्स्क को भूमध्य सागर में भेज दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि पनडुब्बी घातक क्रूज मिसाइलों से भरी हुई है। जानकारी के अनुसार, 40 कैलिबर क्रूज मिसाइलों को पनडुब्बी में तैनात किया गया है, जिनकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक है। रूसी नौसेना की ये पनडुब्बी नाटो देशों के प्रवेश द्वार यानी इटली के तट पर खड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में नाटो देशों के लिए चिंता का विषय यूक्रेन युद्ध से ज्यादा अपनी समुद्री सीमा का रक्षा करना हो गया है। सेवेरॉद्वीन्स्क पनडुब्बी परमाणु शक्ति से लैस है। ऐसे में इसपर तैनात लोगों को खाने और पानी के अलावा पनडुब्बी को सतह पर लाने की भी कोई जरूरत नहीं है। 

नाटो देश पनडुब्बी की लाइव लोकेशन को लेकर बेचैन हैं। उन्हें इस बात का डर है कि पनडुब्बी समुद्री सीमा में घुसपैठ कर सकती है। और यहां आकर रेकी करने के अपने काम को अंजाम दे सकती है। इससे इन देशों को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि पनडुब्बी खतरनाक कैलिबर क्रूज मिसाइलों से भरी हुई है। पनडुब्बी विशेषज्ञ एचआई सट्टन के अनुसार, ओपन सोर्स इंटेलिजेंस का कहना है कि रूस ने अपनी पनडुब्बी को इसलिए भूमध्य सागर में तैनात किया है क्योंकि उसकी यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिम के साथ तनाव बना हुआ है।

40 कैलिबर मिसाइल ढो सकती है पनडुब्बी

उनका कहना है कि यह जहाज रूस की सबसे ताकतवर पनडुब्बी सेवेरॉद्वीन्स्क हो सकती है। जो 1600 मील तक मारक क्षमता रखने वाली 40 कैलिबर मिसाइल ढो सकती है। इसके साथ ही इन मिसाइलों को परमाणु हथियारों से लैस किया जा सकता है। ऐसे में अगर गलती से भी कोई परमाणु मिसाइल फायर हो जाती है, तो नाटो में शामिल किसी भी देश का नामोनिशान मिट सकता है। 

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रूस की सबसे ज्यादा अडवांस पनडुब्बी


 

सेवेरॉद्वीन्स्क पनडुब्बी रूसी नौसेना के हथियारों में शामिल सबसे ज्यादा अडवांस पनडुब्बी है। रूसी मीडिया का दावा है कि पनडुब्बी में बेजोड़ स्टील्थ तकनीक, सक्रिय एंटी-टारपीडो सुरक्षा और हवा-विरोधी मिशन को अंजाम देने की क्षमता है। ऐसा कहा जाता है कि पनडुब्बी को स्लाव-श्रेणी के क्रूजर मार्शल उस्तीनोव के बदले में तैनात किया गया है, जो 24 अगस्त को भूमध्य सागर से चला गया था। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी पनडुब्बी कितने समय से इस क्षेत्र में है। रिपोर्ट के अनुसार, सेवेरॉद्वीन्स्क पनडुब्बी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में मौजूद हो सकती है क्योंकि मार्शल उस्तीनोव ब्रिटेन के पास आक्रामक तरीके से गश्त कर रहा है।

यूक्रेन युद्ध छोड़कर लौटी है पनडुब्बी

इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में ब्रिटिश रॉयल नेवी को आयरलैंड के दक्षिणी तट पर रूसी युद्धपोतों की निगरानी करने के लिए कहा गया था। नौसैनिक सूत्रों के मुताबिक, ये माना जा रहा है कि रूसी नौसेना का यह युद्धपोत और पनडुब्बी यूक्रेन युद्ध में हिस्सा लेकर वापस आ गए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी युद्धपोत ने क्षेत्र में प्रवेश क्यों किया। पूर्व कप्तान और परमाणु शक्ति वाली ब्रिटिश पनडुब्बी के कमांडर रयान रैमसे का कहना है कि रूसियों को ऐसा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन निश्चित रूप से वो जो कुछ भी कर रहे हैं, वह आक्रामक शीत युद्ध के व्यवहार की वापसी जैसा प्रतीत होता है। 

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