FATF Blacklist : एफटीएफ क्या है? पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से मिलेगा छुटकारा या बढ़ी मुसीबतें | New Update 2021

एफटीएफ (Financial Action Task Force- FATF) आज इसकी बैठक होने वाली है. इस बैठक में आज फैसला होगा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा जाए या नहीं. बता दें कि पाकिस्तान 2012-15 से ग्रे लिस्ट में शामिल था. जो कि इससे निकलने के लिए पूरी तरह से हाथ पांव मार रहा है. मगर FTF से अभी तक पाकिस्तान को राहत नहीं मिल पाई है.
वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि कुछ राहत देकर पाकिस्तान को आगे भी ग्रे लिस्ट (gray list) में रखा जाएगा. क्यों कि इससे पहले भी एफटीएफ ने कुछ इसी तरह के कदम उठाए थे. अब देखना लाजमी होगा कि आखिर एफटीएफ क्या फैसला करता है.

एफटीएफ (Financial Action Task Force- FATF) क्या है?

Financial Action Task force
  1. FTAF की स्थापना 1889 में जी 7 समूह के द्वारा अंतर सरकारी निकाय के रूप में हुई.
  2. इसका मुख्यायलय सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग विकास संगठन (Headquarters Secretariat Paris-based Organization for Economic Cooperation Development) के मुख्यालय में स्थित है।
  3. 1990 में पहली बार एफटीएफ के सिफारिशों को लागू किया गया. 1996, 2001, 2003 और 2012 की सिफारिशों को इसलिए संशोधित किया गया कि वे प्रांसगिक और अद्यतन रहे साथ ही उनका निर्णय सार्वभौमिक बना रहे.
  4. अगर कोई देश एफटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल है तो वह आतंकी फंडिग और मनी लॉड्रिंग में अंकुश लगाने में असफर रहा.
  5. भारत एफटीएफ का सदस्य साल 2010 में बना है। एफटीएफ में भारत समेत 37 सदस्य देश और 2 क्षेत्रीय संगठन शामिल है.
  6. एफटीएफ की बैठक 1 साल में तीन बार होती है.
  7. किसी देश का ब्लैक लिस्ट में शामिल होने का मतलब होता है कि उसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (international financial institutions) के द्वारा वित्तीय सहायता मिलनी बंद हो जाती है. इसका मतलब यह होगा कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं जैसे IMF और World Bank से वह देश ऋण प्राप्त नहीं कर सकता. अभी ईरान और उत्तर कोरिया को ब्लैक लिस्ट में रखा गया. भारत में कई आतंकी घटनाओं के बाद पाकिस्तान (Pakistan) को ब्लैक लिस्ट करने की मांग उठी. लेकिन उसका सहयोगी चीन उसे अक्सर बचा लेता है.
  8. एफटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनयामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देती है.

ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट में अंतर | FATF grey and black list

ग्रे लिस्ट- अगर आसान भाषा में समझे तो कोई देश जब अपने यहां आतंकी संगठन (terrorist organization)  को दिये जाने वाले फंडिग और मनी लॉड्रिग जैसी व्यवस्था नियंत्रित ना हो। वो इसे नियंत्रित करने हेतु किसी कार्य-योजना के प्रति प्रतिबद्ध हैं। ये एक तरह की चेतावनी है। तो उसे ‘ग्रे लिस्ट’ (‘Grey List’) में रखा जाता है।

जैसे कि- पाकिस्तान (pakistan)  इसका उदाहरण है. 2012 में पहली बार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शुमार हुआ था और 2015 तक रहा था. इसके बाद 2018 से पाकिस्तान फिर ग्रे लिस्ट में है.

ब्लैक लिस्ट ( Black List) – अगर कोई देश आतंकी संगठन को फंडिग कर रहा है, और कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं कर रहा है, ऐसे में देश को ‘ब्लैक लिस्ट’ (Black list) कर दिया जाएगा।  

इसकी वजह से उस देश को कई परेशानियां उठानी पड़ सकती है. सबसे अधिक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। क्यों कि बाकी के देश उस देश में निवेश करना बंद कर देंगे, और किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग मिलना भी बंद हो जाएगा। विदेशी कारोबारियों और बैकों का उस देश में व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियां उस देश से अपना बिजनेस समेट लेगी।

ब्लैक लिस्ट में शामिल देश को विश्व बैंक (World Bank) , अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund), एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और यूरोपियन यूनियन जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं (international institutions) से कर्ज़ मिलना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा रेटिंग कंपनियाँ जैसे – मूडीज़, स्टैंडर्ड एंड पूअर और फिंट (Moody’s, Standard & Poor’s and Fint) उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं।

ब्लैक लिस्ट में शामिल देश | FATF black listed countries

FATF Banned Countries list

एफएटीएफ (Financial Action Task Force- FATF) ने ब्लैक लिस्ट में ईरान और उत्तर कोरिया को रखा गया हैं. वहीं पाकिस्तान को उसी श्रेणी में रखा जाएगा. इसका मतलब यह होगा कि वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक से कोई ऋण प्राप्त नहीं कर सकेगा। इससे अन्य देशों के साथ वित्तीय डील करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

आज होगा पाकिस्तान के भविष्य (future) का फैसला

अनुमान तो यह लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान (Pakistan) को फिर से ग्रे लिस्ट में रखा जाएगा। जिसकी अवधि 6 महीने होगी। दरअस वैश्विक संस्था ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान 27 कार्यबिदुंओं में से 26 को पूरा किया है। पाकिस्तान को एफएटीएफ (FTAF) के बाकी बचे एक बिंदु को लागू करने के लिए कम से कम दो से तीन महीने और लगेंगे। ऐसे में अमेरिका, भारत, फ्रांस और ब्रिटेन कोई भी छूट देने के लिए तैयार नहीं होने वाले हैं। हालांकि, प्रदर्शन के मामले में पाकिस्तान बहुत आशावादी है कि उसे FATF से अच्छी खबर मिलेगी।

पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट में हुआ शामिल, तो जानिए क्या होगा असर?

 बात की जाए पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की तो इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक नकारात्मक असर पड़ेगा। ये भी हो सकता है कि पाकिस्तान दाने-दाने को मोहताज हो जाए। यहां तक उसका दोस्त भी उसकी कोई मदद नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को हाल वैसे ही बहुत खराब है, और वह अधिकतर विदेशी कर्ज और निवेशकों पर निर्भर है. IMF, विश्व बैंक जैसे बड़े कर्जदार इमरान खान सरकार को वित्तीय मदद करने से पहले सावधानी बरतेंगे. इसके अलावा नियमों का उल्लंघन न हो, इसके लिए पूरी जांच भी की जाएगी. हालांकि इसकी संभावना कम है और माना जा रहा है कि पाकिस्तान आगे भी ग्रे लिस्ट में बना रह सकता है.

आखिर क्यों FATF के ग्रे लिस्ट में शामिल है पाकिस्तान?

पाकिस्तान 2018 से ग्रे लिस्ट में शामिल हैं. क्यों कि वह आतंकियों पर ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा. एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक एफटीएफ ने पाकिस्तान को धन संशोधन और आतंकियों का वित्तपोषण रोकने से जुड़ी 27 बिंदुओं वाली कार्ययोजना सौंपी थी, जिसे 2019 के अंत तक पूरा किया जाना था। हालांकि, कोविड-19 महामारी के मद्देनजर यह समयसीमा बढ़ती चली गई। अक्तूबर 2020 में हुई समीक्षा बैठक में पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक की मोहलत देने का फैसला किया गया। बीते हफ्ते फ्रांस में हुई एफएटीएफ बैठक में पाकिस्तान के 27 बिंदुओं में से 24 को पूरा कर लेने की पुष्टि हुई। बाकी तीन मापदंडों को लागू करने के लिए उसे जून 2021 तक का समय दिया गया।

FATF के ग्रे लिस्ट में बना रहा पाकिस्तान तो जानिए क्या होगा असर

एफटीएफ की इस बैठक में पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना रहा तो उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF ), विश्‍व बैंक (World Bank) और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही कंगाली के हाल में जी रहे पाकिस्तान की हालात और खराब हो जाएगी। दूसरे देशों से भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलना बंद हो सकता है। क्योंकि, कोई भी देश आर्थिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करना नहीं चाहता है।

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