यूक्रेन पर गोले बरसा रहे रूस ने चुराया यूक्रेन का गेहूं, अफ्रीकी देशों को बेच कर कमा रहा मुनाफा, जानिए किसने लगाया ये आरोप?



डिजिटल डेस्क, कीव। यूक्रेन और रूस के बीच अभी भी जंग जारी है। दोनों देशों में कोई भी पहले झुकने का नाम नहीं ले रहा है। दुनियाभर के कई देशों ने शांतिप्रिय तरीके से युद्ध को खत्म करने की मध्यस्थता भी की लेकिन न तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिलचस्पी दिखाई और न ही यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने युद्ध विराम को लेकर पुतिन से बातचीत करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन पुतिन ने नहीं मानी। वैसे युद्ध से दोनों देशों को नुकसान के अलावा अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ।

युद्ध में यूक्रेन को भारी नुकसान तो उठाना पड़ा तो वहीं रूस को अपने सैनिक गंवाने पड़े। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण दुनिया में खाद्यान समस्या बढ़ती जा रही है। युद्ध की वजह से महंगाई जैसी समस्या भी दुनिया के सामने आ खड़ी हुई है। इसी बीच अमेरिका ने रूस पर गंभीर आरोप लगाया है और कहा है कि रूस ने यूक्रेन से पांच टन गेहूं चुरा लिया है। अमेरिका के मुताबिक, रूस अब यही गेहूं अफीकी देशों को बेच रहा है। बताया जा रहा है कि बाजार में इस गेहूं की कीमत करीब 778 करोड़ रूपए है। 

रूस पर चोरी का आरोप

अमेरिका ने रूस पर बड़ा हमला बोला है और कहा है कि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने वहां से गेहूं चुराए हैं। बताया जा रहा है कि रूस के ट्रक यूक्रेन गए थे, लौटते समय गेहूं उसी पर लाद लिया गया था। आरोप है कि रूस ने यूक्रेन से गेहूं लूटकर उसे क्रीमिया भेज दिया है। अब इसी गेहूं को अकाल से जूझ रहे अफ्रीकी देशों के बेचा जा रहा है। उधर, अमेरिका ने दुनियाभर के देशों को चेताया है कि यूक्रेन में रूस युद्ध की स्थिति पैदा कर उसकी परिस्थितियों का फायदा उठा रहा है। 

अफ्रीकी देश क्यों हैं मजबूर?

गौरतलब है कि अफ्रीकी देश हथियारों और अन्य जरूरतों की सामानों को लेकर रूस पर निर्भर हैं। अमेरिका का कहना है कि शक्तिशाली पश्चिमी देशों और रूस के बीच फंसे अफ्रीकी देश इस मामले पर विरोध जताने पर सक्षम नहीं हैं। इसीलिए रूस इन देशों का फायदा उठा रहा है। अफ्रीकी देशों को उसकी कुल जरूरत का लगभग 40 फीसदी गेहूं रूस और यूक्रेन से ही आता है। इस साल दुनियाभर में गेहूं की कीमतों में काफी उछाल आया, जो बढ़कर 23 फीसदी हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल सूखा पड़ने के कारण अफ्रीका के 1.7 करोड़ लोगों के सामने भूख का संकट है। 

युद्ध बना महंगाई का कारण

बीते 24 फरवरी से यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जारी है। जिसकी वजह से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ती जा रही है। खुद रूस और यूक्रेन को भी खाने-पीने से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ पश्चिमी देश यूक्रेन की खुलकर मदद कर रहे हैं। अमेरिका पहले ही यूक्रेन को  हथियार और जरूरी चीजों की सप्लाई का ऐलान कर चुका है। यूक्रेन को पश्चिमी देशों का पूरा मदद मिल रहा है, जिसकी वजह से युद्ध लंबा खिxचता चला जा रहा है। 

 



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