World News: खौफनाक सजा, आखिर क्यों एक बेटी ने कुर्सी को लात मारकर मां को फांसी देकर मारा?


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Highlights

  • बेटी की उम्र अब 19 साल है
  • दा-दादी के साथ रहने को मजबूर होना पड़ा
  • अपनी मां को फांसी पर लटका दिया था

World News: राक में एक बेटी को जबरन अपनी मां की मौत की सजा देने के लिए मजबूर किया गया है। बेटी को उस कुर्सी को धक्का देने के लिए कहा गया जिस पर उसकी मां खड़ी थी और जिसके बाद वह फांसी के फंदे पर झूल गई। ईरान के तानाशाह शासन द्वारा एक बार फिर क्रूर सजा के इस मामले ने दिल को झकझोर कर रख दिया है। इस महिला का नाम मरियम करीमी बताया जा रहा है। 13 साल पहले उसे पति की हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस महिला ने अपने पति को मार डाला था क्योंकि उसे पीटता और प्रताड़ित करता था।

क्या था पूरा मामला?

स्थानीय मीडिया की ओर से बताया गया है कि इस महिला का पति उसे तलाक देने को तैयार नहीं था। महिला के पिता अब्राहम ने उसे बेटी को तलाक देने के लिए मनाने के लिए कई बार कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद पिता ने अपनी बेटी की मदद की ताकि वह अपने पति को मार सके। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन 6 साल की मासूम बेटी को दादा-दादी के साथ रहने को मजबूर होना पड़ा। दादा-दादी ने अपनी पोती से कहा था कि वह अब अनाथ हो गई है। जिस समय मरियम को फांसी दी जानी थी उसके कुछ हफ्ते पहले जो सच्चाई उससे छिपी हुई थी, वह उसके सामने आ गई। बेटी की उम्र अब 19 साल है। इसी साल बेटी ने ईरान की रश्त सेंट्रल जेल में अपनी मां को फांसी पर लटका दिया था।

क्या है किसास?
बेटी ने मैरी के पैरों के नीचे से जिस कुर्सी पर खड़ी थी उसे खींच लिया था। ईरान इंटरनेशनल टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक बेटी ने मां को माफ करने या खून के पैसे लेने से इनकार कर दिया था। मरियम पर बदला लेने का आरोप लगा था जिसे ईरान में किसस के नाम से जाना जाता है। किसास के तहत फांसी के वक्त पीड़िता के बच्चे का मौजूद होना जरूरी है और उन्हें खुद सजा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

बच्चे के हाथ दिलाई गई सजा
ईरान के मानवाधिकार संगठनों ने इसकी निंदा की है। उनका कहना है कि मरियम की बेटी से सच छुपा कर रखा गया था। बात सामने आई तो वह अपनी मां से नफरत करने लगी। उन्होंने किसानों को अमानवीय भी बताया है। साल 2019 में किसास के तहत 225 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। इनमें से 68 को जेल में पूरा किया गया जबकि 4 मामले ऐसे थे जिनमें एक बच्चे के हाथों सजा दी गई थी। इन चारों मामलों में बच्चे नाबालिग थे।

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